हम एक हैं


हम
जब भरी महफ़िल में आए
तब औरों की तरह, हम भी अकेले थे

लेकिन जिस समय वोह आई 
उन्होंने महफ़िल में नयी जान लाई

एक खिली मुस्कान होटों पर
और उज्वल चमक आँखों में

जब उनस  ोस्ती हुई
हम दोनों महफ़िल में अकेले थे

बस वोह थी और हम थे
हमारी एक अलग महफ़िल थी

हमारा महफ़िल से अलग हो जाने से
बेचारी महफ़िल अकेली पड़ गयी

अब जब भी वोह शाम याद आती है
ऐसा लगता है की फिर महफ़िल में हैं

रात को जब कम्बक्त नीद आती है
तो वोह महफ़िल से निकल जाती है

और खुशनसीबी से जब आँख खुलती है
तो वोह हसमुख लम्हे फिर दिखाए देते हैं

यही है महफ़िल जहां हम मिले
बिछड़े लेकिन अलग नहीं हुए

हम एक रहे
हम एक हैं

दिसम्बर २५, २०११               और